कार्बोहाइड्रेट क्या है? संगठन, कार्य और वर्गीकरण (Classification of Carbohydrates)

कार्बोहाइड्रेट के संगठन एवं कार्य का विवरण एवं उसका वर्गीकरण

कार्बोहाइड्रेट ( Carbohydrates in Hindi )

हमारे भोजन का एक आवश्यक तत्त्व कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) भी है। इसे हिन्दी में काबोंज भी कहा जाता है। मनुष्य के अतिरिक्त अन्य सभी भाणी भी इसे एक अनिवार्य पोषक भोज्य पदार्थ के रूप में अनिवार्य रूप से ग्रहण करते हैं। कार्बोहाइड्रेट्स प्रचुर मात्रा में प्रकृति में विद्यमान है। इसका मुख्य स्रोत पनस्पति जगत् है। वनस्पति जगत् में कार्बोहाइड्रेट्स का निर्माण प्राकृतिक क्रिया द्वारा होता है। कार्बोहाइड्स्स का निर्माण पौधों में होने वाली प्रकाश संश्लेषण की किया द्वारा होता है।


पौधों में क्लोरोफिल नामक तत्त्व पाया जाता है। सूर्य के प्रकाश में वायु से ली गई कार्बनडाइ आक्साइड तथा मिट्टी से लिये गये पानी में संश्लेषण के परिणामस्वरूप कार्बोहाइड्रेट्स का निर्माण होता है। यह वनस्पति जगत् ॥ सैल्युलोज एवं स्टॉर्च आदि के रूप में पाया जाता है। वनस्पति जगत् में अधिक मात्रा में विद्यमान कार्बोज को ही पशु एवं मनु अपनी आवश्यकताओं के अनुसार पहण करते हैं। इसे शर्करा युक्त भोज्य पदार्थ भी कहा जाता है।


कार्बोहाइड्रेट का संगठन ( Composition of Carbohydrates )


कार्बोहाइड्रेट एक यौगिक है, जो विभिन्न तत्त्वों के संयोग से बना है। इसमें निहित तत्त्व हैं-कार्बन, हाइड्रोजन तथा आक्सीजन। इन तीनों तत्त्वों का पारस्परिक रासायनिक संयोग के परिणामस्वरूप कार्बोहाइड्रेट का संगठन होता है। कार्बोहाइड्रेट में हाइड्रोजन तथा आक्सीजन का वही अनुपात होता है जो अनुपात पानी में होता है। आणविक रचना की भिन्नता के आधार पर कार्बोज के विभिन्न प्रकार होते हैं।


कार्बोहाइड्रेट का रासायनिक सूत्र होता है- C6H12O6 । स्पष्ट है कि कार्बोहाइड्रेड के एक अणु में कार्बन के 6 परमाणु होते हैं।


कार्बोज प्राप्ति के स्रोत ( Sources of Carbohydrates )


कार्बोज प्राप्ति के समस्त स्रोत वनस्पति जगत् में ही विद्यमान हैं। विभिन्न अनाजों, फलों, सब्जियों तथा अनेक भोज्य पदार्थों में विद्यमान रहता है। अनाजों के मुख्य रूप से गेहूँ, चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, चना आदि में कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। सूखे मटर, सोयाबीन तथा विभिन्न दालों में भी कार्बोज की समुचित मात्रा पायी जाती है।


खजूर, अंगूर, किशमिश, मुनक्का, सूखी खुमानी तथा अंजीर जैसे फल भी कार्बोहाइड्रेट के अच्छे स्रोत हैं। अनाजों एवं फलों के अतिरिक्तको कुछ अन्य पदार्थों में भी कार्बोज पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इस प्रकार के भोज्य पदार्थ हैं-गुड़, शहद, अरारोट, शकरकन्द, आलू आदि, वैसे न्यूनाधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट प्रायः सभी भोज्य पदार्थों में विद्यमान रहता है।


कार्बोहाइड्रेट के कार्य ( Functions of carbohydrates )


भोजन के एक अति आवश्यक तत्त्वं के रूप में कार्बोहाइड्रेट शरीर में विभिन्न पूर्ण कार्य करता है। शरीर के लिये कार्बोहाइड्रेट के कार्य एवं उपयोगिता का संक्षिप्त परिचय निम्नलिखित वर्णित है-


1. ऊर्जा प्रदान करना 

कार्बोहाइड्रेट का शरीर में सबसे महत्वपूर्ण कार्य शरीर विभिन्न कार्यों के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करना है। कार्बोज ऊर्जा के उत्तम है। एक ग्राम कार्बोज में शरीर चार कैलरी ऊर्जा प्राप्त कर सकता है। कार्बोज शरीर को प्रत्यक्ष रूप से ऊर्जा प्राप्त होती है तथा यह शरीर में संगृहीत होकर भी ऊर्जा का स्रोत बनता है। ग्लूकोज से मस्तिष्क तथा नाडी ऊतकों को ऊर्जा प्राप्त होती है।


2. प्रोटीन की बचत में सहायक

भोजन में ग्रहण किया गया कार्बोज शरीर में संगृहीत प्रोटीन की बचत में भी सहायक होता है। यदि हम पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट ग्रहण करते हैं तो इसके प्रज्वलन से शरीर को समुचित मात्रा में कैलोरी प्राप्त हो जाती है। इससे ऊर्जा प्राप्त करने के लिए शरीर की प्रोटीन इस्तेमाल नहीं होती, अतः प्रोटीन की मात्रा अन्य कार्यों के लिए सुरक्षित रहती है।


3. कैल्शियम से शोषण में सहायक

लेक्टोज के रूप में कार्बोज शरीर में कुछ बैक्टीरिया की वृद्धि में सहायक होता है। यह लेक्टोज शरीर में कैल्शियम शोषण में भी सहायक होता है।


4. वसा की बचत में सहायक

पर्याप्त मात्रा में कार्बोज ग्रहण करने से यह शरीर में वसा की बचत में भी सहायक होता है। कार्बोज वसा के अत्यधिक प्रज्वलन को रोकने में भी सहायक होता है।


5. मल-विसर्जन में सहायक

सैलुलोजी, हेमी-सैलुलोज तथा पैक्टिन्स नामक कार्बोज हमारे शरीर में से व्यर्थ पदार्थों अर्थात् मल के विसर्जन में सहायक होते हैं। ये कार्बोज गैस्ट्रो-आन्त्र मार्ग को उत्तेजित करते हैं।


6. कार्बोज की एक उपयोगिता

यह है कि इनसे भोजन स्वादिष्ट बन जाता है। इसके अतिरिक्त यह शरीर के ताप को एक समान बनाये रखने में भी सहायक होता है।


7. विभिन्न आवश्यक तत्त्वों के स्रोत

कार्बोज शरीर के लिए एक अन्य प्रकार से भी विशेष उपयोगी है। कार्बोज युक्त भोज्य पदार्थों में विभिन्न खनिज लवण जैसे कि पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, फासफोरस, लोहां तथा आयोडीन आदि समुचित मात्रा में विद्यमान होते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ अंशों में इनमें विटामिन भी पाये जाते हैं। इन सबकी शरीर को निरन्तर आवश्यकता होती है, जो कि कार्बोजयुक्त भोज्य पदार्थ से पूरी हो जाती है ।


कार्बोहाइड्रेट का पाचन एवं शोषण (Digestion and Absorption of of Carbohydrate) 


कार्बोज का पाचन-भोजन में ग्रहण किये गये काबोंज के पाचन की मुँह से प्रारम्भ हो जाती है। भोजन में ग्रहण किये गये कार्बोहाइड्रेट की रासायनिक क्रिया मुँह में बनने वाले लाररस के टायलिन (Ptyline) नामक एञ्जाइम से होती है। इस क्रिया में परिणामस्वरूप ये काबोंज स्टार्च तथा शर्करा के रूप में परिवर्तित हो जाते है। इसके बाद कार्बोज का पाचन मुख्य रूप से पक्वाशय में होता है। यहाँ पर क्लोम रस पाया जाता है जिनमें एमिलेज (Amylase) नामक एन्ज़ाइम होता है। इन एञ्जाइम के साथ होने वाली क्रिया के परिणामस्वरूप श्वेतसार वाले पदार्थ विभिन्न प्रकार की शर्करा में बदल जाते हैं।


कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरण ( Classification of Carbohydrates )


हम जानते है की कार्बोहाइड्रेट या कार्बोज विभिन्न्न प्रकार के होते है। कार्बोज के भिन्न प्रकारों का वर्गीकरण उनकी आणविक रचना के आधार पर किया जाता हैं। काबोंज कार्बोज का वर्गीकरण उसमें विद्यमान शर्करा की इकाइयों के आधार पर होता इस आधार पर समस्त कार्बोज को सर्वप्रथम तीन वर्गों में विभक्त किया जाता जो कि इस प्रकार हैं-

(क) मोनो सैकराइड्स Monosaccharides),

(ख) डाइसैकराइड्स (Di-Saccharides)

तथा (ग) पोलीसैकराइड्स Poly-Saccharides) ।


इन तीनों वर्गों के कार्बोज तथा उप-प्रकारों का सामान्य चय निम्नलिखित प्रकार से वर्णित है-


(क) मोनोसैकराइड्स (Monosaccharides)

उन सब कार्बोज को मोनोसैकराइड्स कहा जाता है जो जल-विश्लेषण की या के परिणामस्वरूप विभक्त नहीं होते। ये तीन प्रकार के होते हैं:

(1) ग्लूकोज,

(2) फ्रक्टोज तथा

(3) ग्लेक्टोज। इन तीनों का सामान्य परिचय निम्नलिखित प्रकार वर्णित हैं-


1. ग्लूकोज (Glucose)

रचना के अनुसार ग्लूकोज एक सरलतम शर्करा हैं। वास्तव में अन्य जटिल शर्करायें भी पाचन क्रिया के अन्तर्गत विघटित होकर इसी रूप को ग्रहण करती है। ग्लूकोज का पाचन एवं शोषण अन्य शर्कराओं से सरल एवं शीघ्र होता है। इस ग्रहण करने से शरीर को ऊर्जा मिलती तथा शरीर की थकावट एवं कमजोरी शीघ्र दूर हो जाती है। ग्लूकोज को डेस्ट्रोज भी कहा जाता । इसे विभिन्न प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है। यह अंगूर में पर्याप्त मात्रा में पाया  जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य अनेक फलों में भी पाया जाता है।  शरीर में ग्लूकोज मुख्य रूपसे यकृत में संगृहीत रहता है। इसके अतिरिक्त मासपेशियों एवं रक्त में भी इसकी निश्चित मात्रा रहा करती है। रक्त में ग्लूकोज की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है तो मधुमेह (Diabeties) नामक रोग जाता है।


2. फ्रक्टोज (Fructose)

फ्रक्टोज भी एक मोनोसैकराइड है। यह भी मुख्य रूप से फलों, पौधों के रसों, गन्ने तथा शहद आदि में पाया जाता है। फ्रक्टोज का स्वाद मीठा होता है। यह ठोस एवं रवेदार होता है। वह पानी में सरलता से घुल जाता है।


3. ग्लेक्टोज (Galactose)

यह मुख्य रूप से शहद तथा शी (Molasses) में पाया जाता है। ग्लूक्टोज सेरेब्रोमाइड्स का एक भाग है, जो वि मस्तिष्क तथा स्नायु-तन्तुओं के मुख्य तत्त्व हैं।


(ख) डाइसैकराइड्स (Di-Saccharides)

डाइसैकराइड्स की एक इकाई सैकराइड्स की दो इकाइयों के मिलन के परिणामस्वरूप बनती है। यदि डाइसैकराइड्स के एक अणु का विभाजन किया जाए तो मोनोसैकारइड्स के दो अणु बनते हैं। समस्त डाइसैकराइड्स स्वाद में मीठे होते हैं तथा जल में घुलनशील होते हैं। इनके रवे बन जाते हैं। खण्डन के परिणामस्वरूप


ये साधारण शर्करा में विभक्त हो जाते हैं। डाइसैकराइड्स तीन हैं, जिनका सामान्य परिचय निम्नलिखित प्रकार वर्णित हैं-


1. सुक्रोज (Sucrose)

सुक्रोज को गन्ने अथवा चुकन्दर की शर्करा के रूप में भी जाना जाता है। सुक्रोज ग्रहण करने पर पाचन के परिणामस्वरूप ग्लूकोज तथा फ्रक्टोज में विभक्त हो जाता है। यह विभिन्न फलों एवं सब्जियों में पाया जाता है। मुख्य रूप से गन्ना, चुकन्दर, ताड़, अनन्नास तथा गाजर इसकी प्राप्ति के स्रोत हैं।


2. ग्लूकोज (Lactose)

लेक्टोज को दुग्ध शर्करा भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से सभी प्रकार के दूध में पाया जाता है। पाचन क्रिया के परिणामस्वरूप इसे ग्लूकोज तथा लेक्टोज बराबर-बराबर अनुपात में प्राप्त होते हैं, लेक्टोज हमारे शरीर के नीचे आंत्रपथ को ठीक रखने में सहायक होते हैं। लेक्टोज अन्य शर्कराओं में से एक विशेष उपयोगी होती है। की तुलना में कम मीठी होती है तथा कम ही घुलनशील होती है। शरीर के लिये


3. माल्टोज (Maltose)

माल्टोज को जबा शर्करा भी कहते हैं। यह मुख्य रूप से अंकुरित अनाजों में विद्यमान होता है । वास्तव में, जब अनाज अंकुरित होते है, तब उनमें विद्यमान श्वेतसार माल्टीय शर्करा का रूप ले लेते हैं । माल्टोज के एक अणु से विखण्डन के परिणामस्वरूप ग्लूकोज के दो अणु प्राप्त होते हैं। पाचन फ्रक्टोज बदल जाते हैं। भक्रिया के अन्तर्गत डाइस्टेज एञ्जाइम के प्रभाव से जवा के स्टार्च माल्टोज के रूप में


(ग) पोली सैकराइड्स (Poly Saccharides)

यह एक जटिल कार्बोहाइड्रेट है। इसके एक अणु में मोनोसैक्राइड्स के अनेक अणु होते हैं। कार्बोहाइड्रेट के समान इनका स्वाद मीठा नहीं होता तथा ये सामान्य रूप से जल में घुलनशील नहीं होते। इनका पाचन पूर्ण रूप से नहीं हो पाता। कार्बोहाइड्रेट्स के इस समूल में तीन प्रकार के कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं, जिनका सामान्य परिचय निम्नलिखित प्रकार वर्णित है-


1. स्टार्च (Starch)

स्टार्च एक मुख्य पोली सैकराइड्स है। इसे विभिन्न प्राकृतिक स्रोतों से सरलता से प्राप्त किया जा सकता है। पौधे स्टार्च के रूप में ही कार्बोज की अत्यधिक मात्रा संगृहीत रखते हैं। स्टार्च प्राप्ति के मुख्य स्रोत हैं- सभी प्रकार के अनाजों जैसे कि गेहूँ, मक्का, चावल, साबूदाना, ज्वार, बाजरा आदि जड़दार कन्द जैसे कि आलू, शकरकन्द, अरबी आदि।


इस प्रकार से स्पष्ट है कि स्टार्च एक सर्व-सुलभ एवं सस्ता कार्बोज है। सामान्य रूप से ठण्डे जल में स्टार्च नहीं घुल पाते। परन्तु गरम जल में यह आंशिक रूप से घुलनशील है। जब भोजन में स्टार्च ग्रहण किया जाता है तो पाचन क्रिया के परिणामस्वरूप पहले यह छोटे-छोटे पोली माल्टोज तथा ग्लूकोज में परिवर्तित होता है। शर्करा युक्त भोज्य पदार्थों की तुलना सैकराइड अर्थात् डेक्सट्रिन में विभक्त हो जाते हैं। इसके बाद क्रमशः डाइसेकराइड में स्टार्च कम तथा धीरे-धीरे शक्ति प्रदान करते हैं।


2. सेलुलोज (Cellulose)

सेलुलोज नामक पोली सैकराइड मुख्य रूप से हरी सब्जियाँ, चुकन्दर, फल, गाजर, बन्दगोभी, शलजम तथा अञ्जीर आदि में विद्यमान होता है। यह मुख्य रूप से सब्जियों के रेशे तथा अनाज के छिलकों में पाया जाता है। शरीर के लिये यह विशेष उपयोगी है।


सेलुलोज का पाचन नहीं होता, परन्तु यह पाचन क्रिया में सहायक होता है। ये आँतों की मांसपेशियों की क्रियाशीलता को उत्तेजित करते हैं। इससे आँतों के संकुचन एवं प्रसारण के लिए शक्ति प्राप्त होती है। ये किसी भी प्रकार से जल में घुलनशील नहीं होते। इसीलिए इनका शोषण नहीं हो पाता। सेलुलोज से कब्ज दूर होती है।


3. ग्लाइकोजन (Glycogen)

ग्लाइकोजन की रासायनिक रचना भी लगभग स्टार्च के ही समान होती है। इसे पशु-स्टार्च भी कहा जाता है, क्योंकि यह मुख्य रूप से प्राणियों के यकृत में संगृहीत रहता है। जल विश्लेषण के परिणामस्वरूप यह ग्लूकोज में विभक्त होता है।


यकृत में संगृहीत ग्लाइकोजन, रोग की अवस्था में तथा उपवास की अवस्था में शरीर को शक्ति प्रदान करता है। यदि अधिक मात्रा में स्टार्च ग्रहण किया जाये तो शरीर में ग्लाइकोजन की अधिक मात्रा संगृहीत हो जाती है।


FAQs
Q1: कार्बोहाइड्रेट के मुख्य कार्य क्या हैं? उत्तर: कार्बोहाइड्रेट का मुख्य कार्य शरीर को त्वरित ऊर्जा (Energy) प्रदान करना है। इसके अलावा, यह प्रोटीन को 'ऊर्जा-बचत' (Protein Sparing Action) करने में मदद करता है और शरीर में वसा के ऑक्सीकरण के लिए भी आवश्यक है। Q2: कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरण कैसे किया जाता है? उत्तर: कार्बोहाइड्रेट को उनके अणु (molecules) के आधार पर तीन वर्गों में बांटा गया है: मोनोसैकराइड (जैसे: ग्लूकोज, फ्रुक्टोज) डाइसैकराइड (जैसे: सुक्रोज, लैक्टोज) पॉलीसैकराइड (जैसे: स्टार्च, सेल्यूलोज, ग्लाइकोजन) Q3: शरीर के लिए कार्बोहाइड्रेट क्यों आवश्यक है? उत्तर: कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर के लिए ईंधन की तरह है। यह मस्तिष्क की कार्यप्रणाली, मांसपेशियों के संकुचन और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) के सही संचालन के लिए अनिवार्य है। Q4: किन खाद्य पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है? उत्तर: कार्बोहाइड्रेट के मुख्य स्रोत चावल, गेहूं, मक्का, आलू, शकरकंद, फल और चीनी हैं। Q5: अधिक कार्बोहाइड्रेट का सेवन करने से क्या होता है? उत्तर: आवश्यकता से अधिक कार्बोहाइड्रेट लेने पर शरीर इसे 'ग्लाइकोजन' या 'वसा' (Fat) के रूप में जमा करने लगता है, जिससे मोटापा और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

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