Enzyme: एंजाइम क्या होता है?

एंजाइम क्या होता है?


एंजाइम एक प्रकार के कार्बनिक उत्प्रेरक हैं जो जीवित पदार्थों में ही पाये जाते हैं। ये घुलनशील व कोलायडीय (Colloidal) होते हैं। पाचक रसों में उपस्थित एंजाइम जिन्हें प्रकिण्व भी कहते हैं, वास्तव में भोजन पर रासायनिक क्रिया करते हैं। इनका निर्माण मुख्यतः प्रोटीन से होता है। यह 100°C पर नष्ट हो जाते हैं।


एंजाइम जटिल भोज्य पदार्थों को सरल रूपों में परिवर्तित कर देते हैं। ये कार्बनिक जीव उत्प्रेरक (Organic Biocatalyst) होते हैं। यह उत्प्रेरक की भाँति प्रकिण्व पदाथों में पायी जाने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं को बढ़ावा देते हैं। क्रिया की समाप्ति पर ये गुण व परिमाण में सामान्य बने रहते हैं।


एंजाइम की उपस्थिति में किसी भी प्रकार की रासायनिक प्रतिक्रिया शरीर के भीतर नहीं हो पाती। वास्तव में ये क्रिया की गति को तेज एवं मन्द नहीं करते, ये केवल प्रक्रिया को आरम्भ ही करते हैं। ये संयुक्त पदार्थों को साधारण पदार्थों में विभक्त करते हैं। ये सभी रासायनिक क्रियायें किन्हीं विशेष एंजाइम के कारण होती हैं।


एंजाइम की विशेषताएं ( Features of enzymes )


1. ये रासायनिक पदार्थ हैं जो केवल अपनी उपस्थिति से जिस पदार्थ में उसे मिला दिया जाय उसें रासायनिक क्रिया आरम्भ कर देते हैं। क्रिया के अन्त पर उतनी ही मात्रा इनकी बनी रहती है जितनी कि आरम्भ में मिलाई गई थी, क्योंकि यह उत्प्रेरक के रूप में क्रिया करते हैं।


2. ताप का उन पर विशेष प्रभाव होता शतांश पर उनकी क्रिया बन्द हो जाती है और 100° शतांश पर उनकी शक्ति सदा के लिए नष्ट हो जाती है। 40° शतांश पर उनकी क्रिया अत्युत्तम होती है। अतः एन्जाइम की क्रियाशीलता के लिए उचित तापक्रम की आवश्यकता होती है।


3. जिस वस्तु के घोल में उनको मिलाया जाता है। उसकी प्रतिक्रिया का भी बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। अधिक आम्लिक या क्षारीय प्रतिक्रिया में उनका काम बन्द हो जाता है। एंजाइम की क्रिया बहुत-सी रासायनिक व भौतिक दशा, वातावरण के तापक्रम, अम्लीयता, क्षारीयता आदि का एंजाइम की प्रतिक्रिया पर प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, ट्रिप्सिन एंजाइम क्षारीय दशा में ही काम कर सकता है जबकि आमाशयिक रस में उपस्थित पेप्सिन केवल अम्लीय दशा में क्रियाशील होता है।


4. इनकी क्रिया के फलस्वरूप जो पदार्थ उत्पन्न होते हैं, उनकी अधिकता होने पर भी इनकी क्रिया बन्द हो जाती है।


5. ये इञ्जाइम क्रिया के पहले निष्क्रिय अवस्था में रहते हैं। पाचक अंगों में आने के बाद उचित माध्यम से मिलने पर ये सक्रिय हो जाते हैं जैसे- ट्रिप्सनोजन सक्रिय रूप ट्रिप्सिन में बदल जाता है। इसी प्रकार पेप्सीनोजन पेप्सिन में एवं टायलिनोजन टायलिन में परिवर्तित हो जाता है।


6. प्रत्येक भोज्य तत्त्व पर क्रिया करने वाला इञ्जाइम अलग होता है। प्रोटीन पर क्रिया करने वाले इञ्जाइम केवल प्रोटीन पर क्रिया करते हैं, इन्हें प्रोटीएज या प्रोटीयोलिटिक एञ्जाइम कहते हैं। इसी प्रकार वसा पर क्रिया करने वाले लाइपेज तथा स्टार्च पर क्रिया करने वाले इञ्जाइम को ऐमाइलेज कहते हैं। इस प्रकार एंजाइम की प्रकृति एक विशेष प्रकार की होती है। एक एञ्जाइम किसी एक विशेष रासायनिक पदार्थ पर ही क्रिया करता है अन्य पदार्थों पर उसकी प्रतिक्रिया नहीं होती । इस विशेषता को उसकी 'विशिष्टता' (Specificity) कहते हैं।


7. भोज्य पदार्थों पर एञ्जाइम की प्रतिक्रिया को समझना वास्तव में कठिन है। यह क्रिया उ‌द्द्विच्छेदन (Hydrolysis) की क्रिया होती है। इस क्रिया में किण्व भोज्य (Substrate) एक अणु पानी इस प्रकार ले लेता है कि वह किण्व भोज्य दो भागों में विभक्त हो जाता है और उसका एक भाग पानी का (H) भाग ले लेता है और दूसरा (OH) भाग लेता है।


एन्जाइम A + H₂O   —> ← B+C+Enzyme


इस क्रिया में एंजाइम रासायनिक तौर पर कोई भाग नहीं लेता ।


8. कुछ विपरीत परिस्थितियों में एञ्जाइम की क्रिया विपरीत दिशा में भी होती है। यकृत में ग्लूकोस को ग्लाइकोजन में बदलते वाला फास्फोरीलेज (Phosphorylase) एञ्जाइम विशेष परिस्थितियों में ग्लूकोजन को ग्लूकोस में भी परिणत कर देता है। इस प्रकार एंजाइम को विश्लेषणात्मक तथा संश्लेषणात्मक प्रतिनिधि कहा जाता है।


ग्लाइकोजन + H3PO3 → फास्फो ग्लूकोज


एन्जाइम के प्रकार


1. एमाइलोलाइटक एन्जाइम (Amylolitic Enzyme) –

इनको कार्बोहाइड्रेसिस (Carbohydrasis) भी कहते हैं। ये एञ्जाइम कार्बोज को उद्दिच्छेदित (Hydrolyse) करते हैं। ये भी दो प्रकार के होते हैं-


(अ) पॉली-सैकराइडेसिस (Poly-sacchridases) –

यह एञ्जाइम स्टार्च को डैक्सट्रिन (Dextrine) तथा माल्टोज (Maltose) में बदल देते हैं। लार (Saliva) रस के साथ प्रतिक्रिया करने वाला टायलिन (Ptylin) एआइम इसी श्रेणी में सम्मिलित किया जा सकता है। इसी प्रकार अग्नाशयिक मन्थि (Pancreas) में पाया जाने वाला एमाइलेज (Amylase) भी स्टार्च पर क्रिया करके उसे डैक्सट्रिन और माल्टोज में बदल देता है। यह पदार्थ शर्करा का ही रूप है।


(ब) सैकराइडेस (Sacchridases) –

यह एंजाइम यौगिक शर्करा (Compound) को साधारण शर्करा में बदल देते हैं। आंत रस (Intestinal Juice) में पाया जाने वाला माल्टोज, माल्टोज शर्करा को ग्लूकोस (Glucose) शर्करा में बदल देता है। सुक्रेज, सुक्रोज, शर्करा को फ्रक्टोज (Fructose) और ग्लूकोज में परिवर्तित कर देता है। आंत्र रस में उपस्थित लैक्टेज, लैक्टोज को प्रथम ग्लेक्टोज (Glaxtose) और फिर ग्लूकोज में बदल देता है।


2. लिपोलाइटिक एंजाइम (Lipolytic Enzyme) -

इस एञ्जाइम को लाइपेसिस (Lipases) भी कहा जाता है। ये केवल वसा पर ही क्रिया करते हैं। इनकी प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप वसा, वसा अम्लों (Fatty Acids) तथा ग्लिसरोल (Glycerol) में परिवर्तित हो जाती है। आमाशयिक रस में पाए जाने वाला लाइपेज (Lipase) एंजाइम केवल वसा पर ही प्रतिक्रिया करता है। इस प्रतिक्रिया से वसा, वसा अम्ल तथा ग्लिसरीन (Glycerine) के रूप में विभक्त हो जाती है।


इस प्रकार अग्नाशयिक रस में पाया जाने वाला Steapsin अथवा लाइपेज एंजाइम वसा पर प्रतिक्रिया करके उसे वसा अम्ल और ग्लिसरीन में बदलता है। इस समूह में पाये जाने वाले अन्य एञ्जाइम भी हैं जो आंत्र रस में पाये जाते हैं तथा वसा से शेष भाग को जिस पर अग्नाशयिक रस की प्रतिक्रिया नहीं हो पाती, वसा, अम्ल तथा ग्लिसरीन में बदल देते हैं।


3. प्रोटिआलिटिक एंजाइम (Proteolytic Enzyme) –

ये केवल प्रोटीन पर ही क्रिया करते हैं और उन्हें महीन कणों में बदलकर पाचनशील बनाते हैं। आमाशय में पाया जाने वाला पेप्सीन (Pepsin) अविलेय (Insoluble) प्रोटीन को पेप्टोन (Peptone) में बदल देता है। इसी प्रकार आमाशयिक रस के साथ प्रोटिएज (Protease) नामक एंजाइम मिलकर दुग्ध प्रोटीन केसीन को पेप्टीन में बदलकर ट्रिप्सन (Trypsin) बना देता है।


ट्रिप्सिन एंजाइम अग्नाशयिक रस के. साथ मिलकर प्रोटीन पर क्रिया करता है और पेप्टोन को एमीनो एसिड (Amino Acids) में परिवर्तित कर देता है। एण्टरोकाइनेस (Enterokinase) तथा इरेप्सिन (Propsin) एन्जाइम भी आंत्र रस के साथ मिलकर पक्वाशय (Duodenum) ॥ बचे हुए प्रोटीन के शेष भाग पेप्टोन (Peptone) को अमीनो एसिड में बदल देते हैं।


उदविच्छेदित (Hydrolysis) करने पर ग्लूकोस और फ्रक्टोज बनते हैं-


C12H29 + O11 + H2O —> C6H12O6 + C8H2O6 


#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top