होम रूल आंदोलन
श्रीमती एनी बेसेन्ट एक आयरिश महिला और भारत में थियोसाफिकट सोसायटी की संचालिका थी। इस समय आयरलैण्ड में आयरिश नेता 'रेडमाण्ड नेतृत्व में 'होमरूल लीग' की स्थापना हुई थी, जो वैधानिक और शान्तिमय उपाय आयरलैण्ड के लिये होमरूल या स्वशासन प्राप्त करना चाहती थी। श्रीमती यही चाहती थीं कि भारत में भी आयरलैण्ड की भाँति 'होमरूल आन्दोलन' चला जाय। इसी हेतु वे स्वयं कांग्रेस में शामिल हुयीं और उदारवादियों एवं उग्रवादियों क एकताबद्ध कर 'होमरूल आन्दोलन' चलाया।
भारत में होमरूल आन्दोलन का नेतृक लोकमान्य तिलक और श्रीमती ऐनी बेसेण्ट के द्वारा किया गया। प्रथम विश्वयुद्ध फलस्वरूप आत्म-निर्णय की भावना को बहुत शक्ति मिली।
इस युग में कांग्रेस का उद्देश्य था कि पूर्ण स्वराज्य ही प्राप्त करना है सम्भव तो अंग्रेजी स्वराज्य के भीतर ही और आवश्यक हो तो उसके बाहर और 1930 यह घोषणा कांग्रेस के मंच से स्पष्ट शब्दों में व्यक्त कर दी गई।
इस युग में महात्मा गाँधी ही प्रमुख नेता थे। इन्होंने भारतीय राजनीति में एक नई विचारधारा का सूत्रपात किया। गाँधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस आन्दोलन एवं सार्वजनिक आन्दोलन बन गया। कांग्रेस का उद्देश्य भारतीय समाज का सर्वांगीण विकास था। महात्मा गाँधी इस उद्देश्य से लोगों को पाँच व्रत लेने को कहते थे-चर्खा काटना, मादक वस्तु निषेध, हिन्दू-मुस्लिम एकता और स्त्रियों के प्रति समानत का व्यवहार। इन व्रतों का भी अहिंसा द्वारा ही प्रचार करना था।
प्रथम विश्व-युद्ध के फलस्वरूप आत्मनिर्णय की भावना को बहुत शक्ति मिली युद्ध में कांग्रेस ने राजभक्ति का पर्याप्त परिचय दिया। महात्मा गाँधी ने स्थान पर जाकर लोगों को सेना में भर्ती और युद्ध के लिए प्रयत्न करने की प्रेरणा दी। उन्हें सरकार का 'भर्ती करने वाला सार्जेन्ट' के नाम से पुकारते थे।

