संरचनात्मक एवं योगात्मक मूल्यांकन में अंतर - Difference between formative and summative assessment
संरचनात्मक मूल्यांकन (Structural assessment)
निर्माणात्मक मूल्यांकन के अन्तर्गत शिक्षक अपने शैक्षिक कार्यक्रम, शिक्षण विधि आदि की गुणवत्ता, प्रभावकारिता तथा उपयोगिता का आकलन इसलिए करता है कि उस शैक्षिक कार्यक्रम शिक्षण विधि को और अधिक उत्तम, प्रभावशाली तथा उपयोगी बनाया जा सके। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि निर्माणात्मक मूल्यांकन इसलिए करना आवश्यक है, जिससे किसी निर्माणाधीन शैक्षिक कार्यक्रम, शिक्षण प्रविधि को अंतिम रूप देने से पूर्व उसमें आवश्यक संशोधन किया जा सके।
इस प्रकार का मूल्यांकन शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के क्रियान्वयन स्तर पर किया जाता है। किसी कक्षा के छात्रों के लिए किसी विषय का पाठ्यक्रम निर्माण करते समय उसके प्रारम्भिक प्रारूप का मूल्यांकन इस दृष्टि से किया जाता है कि उसको अंतिम रूप देने से पूर्व इसमें वांछित सुधार किया जा सके।
इस तरह इस प्रकार के मूल्यांकन के परिणाम शिक्षक-अधिगम प्रक्रिया को सदैव ही एक नवीन रूप देने, नए तरह से उसका निर्माण करने आदि के रूप में फलीभूत होते रहते हैं। उद्देश्य केवल यही होता है कि छात्रों के निर्माण या विकास के कार्य को सही दिशा और दशा प्राप्त होती रहे। प्राप्ति आकड़ों के मूल्यांकन एवं विश्लेषण में शिक्षक को प्रतिपुष्टि प्राप्त होती है, जिसके आधार पर शिक्षण विधि में आवश्यक संशोधन किया जाता है।
ऐसा देखने को मिलता है कि शिक्षक अपने शिक्षण के दौरान विद्यार्थियों से प्रश्न पूछता रहता है जो छात्र को किसी पाठ को सीखने में सहायक होते हैं और शिक्षण को रूचिकर एवं सजीव बनाते है। पाठ की किसी इकाई का शिक्षण समाप्त करने के बाद अध्यापक, विद्यार्थियों के समक्ष कुछ ऐसे प्रश्नों को प्रस्तुत करता है,, जिससे उसे यह जानकारी हो सके कि छात्रों ने उसके विषय में कितना सीखा है।
इससे शिक्षक को यह भी जानकारी हो जाती है कि उसकी शिक्षण विधि कितनी प्रभावशाली है। इससे शिक्षक प्रतिपुष्टि (Feed-back) प्राप्त करके अपने पूर्व की शिक्षण विधि में अपेक्षित परिवर्तन करता है। शिक्षक जब कक्षा में शिक्षण कार्य करते समय प्रश्नों द्वारा सीखने वाले शिक्षार्थी की उपलब्धि का मूल्यांकन करता है, तो इसे निर्माणात्मक या संरचनात्मक मूल्यांकन कहते है।
योगात्मक मूल्यांकन ( Summative Assessment )
योगात्मक मूल्यांकन का अर्थ किसी पूर्व विकसित शैक्षिक कार्यक्रम पाठ्यक्रम, शिक्षण विधि, शिक्षण सामग्री की उपयुक्तता की जांच करता है। इससे स्वीकृति शैक्षिक कार्यक्रमों, शिक्षण विधि ायों आदि को जारी करने के सम्बन्ध में निर्णय लिया जा सकता है।
उदाहरण के लिए माना हाईस्कूल की छात्राओं के लिए अर्थशास्त्र पुस्तक का चयन करना है, तो इसके लिए हाईस्कूल के अर्थशास्त्र पाठ्यक्रम पर लिखी ऐसी सभी पुस्तकों का मूल्यांकन करना होगा। इन पुस्तकों में से उसी पुस्तक का चयन किया जाएगा जो शैक्षिक उद्देश्य तथा पाठ्यक्रम आदि की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ होंगी। यहां पर पूर्वलिखित पुस्तकों का योगात्मक मूल्यांकन किया जाएगा।
इस परिस्थिति में विभिन्न लेखकों अथवा प्रकाशकों द्वारा प्रस्तुत उक्त पुस्तकों में सुधान अथवा संशोधन करना संभव नहीं है। इसी प्रकार यदि हम किसी कक्षा के लिए पूर्व निर्धारित प्रवेश प्रक्रिया शिक्षण कार्यक्रम शिक्षण पद्धति आदि की वांछनीयता का आकलन करना चाहते हैं, जिससे उसे हम आगामी वर्षों में भी जारी रख सकें, तो इसके लिए योगात्मक मूल्यांकन करना होगा।
योगात्मक मूल्यांकन का इस्तेमाल यह जानने के लिए किया जाता है कि किस सीमा तक शिक्षण के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफलता मिली है। इसका मुख्य कार्य बालकों को श्रेणीबद्ध करना है। किन्तु इसके माध्यम से परोक्ष रूप से यह भी विदित हो जाता है कि पाठ्यक्रम के उद्देश्य किस सीमा तक विदित है और किसी सीमा तक शिक्षण कार्य प्रभावशाली सिद्ध हुई है।
संरचनात्मक एवं योगात्मक मूल्यांकन के बीच अंतर - Difference between formative and summative assessment
संरचनात्मक मूल्यांकन - Structural assessment
1. संरचनात्मक मूल्यांकन का उपयोग सीखने की प्रगति के लिए किया जाता है।
2. संरचनात्मक मूल्यांकन को कई लोगों द्वारा 'सीखने के लिए आकलन' भी कहा जाता है।
3. संरचनात्मक मूल्यांकन शिक्षण प्रक्रिया की कितनी दशा का ज्ञान कराता है।
4. संरचनात्मक मूल्यांकन शिक्षण प्रक्रिया के दौरान लगातार होता है।
5. संरचनात्मक मूल्यांकन का कार्य छात्रों के पृष्ठपोषण प्रदान करना है।
6. संरचनात्मक मूल्यांकन छात्रों को यह बताता बताता है कि उसे कहाँ सुधार की आवश्यकता है।
7. संरचनात्मक मूल्यांकन का मूख्य प्रयोजन छात्रों को वह रचनात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त करने में सक्षम बनाना है जो उन्हें बेहतर सीखने और प्रभावी प्रगति करने में उनकी मदद करेगी।
8. संरचनात्मक मूल्यांकन का मुख्य उद्देश्य शैक्षिक कार्यक्रम एवं सामग्री की कमियों को इंगित करना तथा उन्हें दूर करने के उपाय बताना है।
योगात्मक मूल्यांकन - Summative Assessment
1. योगात्मक मूल्यांकन का उपयोग आम तौर पर क छात्र की अन्य छात्रों के समक्ष तुलना करने के लिए किया जाता है।
2. योगात्मक मूल्यांकन को 'सीखने के मूल्यांकन' के नाम से भी जाना जाता है।
3. योगात्मक मूल्यांकन शिक्षण प्रक्रिया सफल रही, इसका ज्ञान कराता है।
4. योगात्मक मूल्यांकन एक निश्चित अवधि के पश्चात होता है।
5. योगात्मक मूल्यांकन का कार्य छात्रों को ग्रेड एवं प्रमापत्र प्रदान करना है।
6. योगात्मक मूल्यांकन छात्रों को यह है कि उसने कितना सुधार किया है।
7. योगात्मक मूल्यांकन का प्रयोजन शिक्षक को छात्रों की उपलब्धि और कार्य प्रदर्शन की पहचान करने में सक्षम करना है।
8. योगात्मक मूल्यांकन का उद्देश्य किसी पूर्व निश्चित एवं लागू शिक्षा नीति, योजना तथा कार्यक्रम, पाठ्य वस्तु, शिक्षण-विधि मूल्यांकन विधि की उपयोगिता की परख करना है।

