मूल्यांकन का अर्थ एवं परिभाषा - Meaning and definition of evaluation
शिक्षा में मूल्यांकन का प्रयोग वर्तमान शताब्दी की घटना है। ग्रीन एवं अन्य का कथन है कि "शिक्षा में मूल्यांकन अभी एक नवीन धारणा है। इसका प्रयोग विद्यालय कार्यक्रम शैक्षिक सामग्री, शिक्षक एवं वालकों की जांच के लिए किया जाता है।" इसके द्वारा शिक्षण के उद्देश्यों, सीखने के अनुभवों तथा परीक्षणों में घनिष्ठ सम्बन्ध स्थापित किया जाता है।
दूसरे शब्दों में, मूल्यांकन के अन्तर्गत किसी गुण, योग्यता अथवा विशेषता का मूल्य निर्धारित किया जाता है अर्थात् मूल्यांकन द्वारा परिमाणात्मक तथा गुणात्मक दोनों ही प्रकार की सूचनाएँ प्राप्त होती हैं जिनके आधार पर बालक की योग्यता एवं उपलब्धियों का आकलन किया जाता है। मूल्यांकन के शाब्दिक अर्थ को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है -
मूल्यांकन = मापन + मूल्य निर्धारण
इस प्रकार मूल्यांकन का आशय मापन के साथ-2 मूल्य निर्धारण से है अर्थात् अधिगम अनुभवां द्वारा छात्रों में अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन किस सीमा तक हुए ? इसका मूल्य निर्धारण (मूल्यांकन) करके निर्णय देना है।
क्विलेन व हन्ना के अनुसार
विद्यालय द्वारा बालक के व्यवहार में लाए गए परिवर्तनों के सम्बन्ध में प्रमाणों के संकलन और उनकी व्याख्या करने की प्रक्रिया को मूल्यांकन कहते है।
गुड्स के अनुसार :-
मूल्यांकन एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे सही ढंग से किसी वस्तु का मापन किया जा सकता है।
क्लाक तथा स्टार के अनुसार
"मूल्यांकन छात्र के वर्तमान कार्य के सम्बन्ध में उपलब्ध सूचना के आधार पर निरुपित निर्णय है।
बेस्ले तथा रास्की के अनुसार
"मूल्यांकन छात्र के व्यवहार में हुए परिवर्तनों से सम्बन्धि ात समस्त सूचनाएँ एकत्रित करने तथा उनकी विवेचना करने की पद्धति है।
डान्डेकर के अनुसार :
मूल्यांकन एक ऐसी क्रमबद्ध प्रक्रिया है। जो हमें यह बताती है कि बालक ने किस सीमा तक किन उद्देश्यों को प्राप्त किया है।

