अच्छे गृह विज्ञान शिक्षक की क्या विशेषता है?
गृह विज्ञान शिक्षक की विशेषतायें रविन्द्र नाथ टैगोर का कथन है "शिक्षक की अध्ययनशीलता केवल पुस्तकीय ज्ञान तक की ही सीमित नहीं रहनी चाहिये। उसका वास्तविक अध्ययन क्षेत्र तो छात्र है, जिसकी प्रकृति का उसे अध्ययन करना है। शिक्षक की अपने छात्र की सहज प्रवृत्ति, भावना, आकांक्षा, भय, जुगत्सा आदि का अध्ययन सहानुभूतिपूर्ण ढंग से करना चाहिये।"
कोठारी आयोग ने लिखा है कि शिक्षा के गुण तथा राष्ट्रीय विकास में शिक्षा की देन को प्रभावित करने वाले विभिन्न तत्वों में अध्यापकों की योग्यता, क्षमता, चरित्र की शुद्धता, निसन्देह अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
वस्तुतः शिक्षक का स्थान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। यह वह माध्यम है जिसके द्वारा समाज की एक पीढ़ी अपने द्वारा अर्जित ज्ञान को अगली पीढ़ी को स्थानान्तरित करती है।
गृह विज्ञान अध्यापिकाओं में अपेक्षित गुर्गों के विषय में बहुत से शिक्षाशास्त्रियों ने गूढ अध्ययन किया है, जिनमें फिन्ले (Finley) एवं हर्ड (Hard) प्रमुख है। इनके अनुसार गृह विज्ञान शिक्षिका में अपेक्षित गुणों का अध्ययन हम दो भागों में कर सकते है।
अ) सामान्य योग्यताएँ (General Ablities)
ब) विशिष्ट योग्यताएँ (Specific Ablities)
अ) सामान्य योग्यताएँ (General Ablities)
1. स्वस्थ व्यक्तित्व
2. नेतृत्व क्षमता
3. आत्म विश्वास
4. सहानुभूति पूर्ण व्यवहार
5. निष्पक्ष दृष्टिकोण
6. स्पष्टवादिता
7. अभिव्यक्ति की शक्ति
8. अध्ययनशीलता
ब) विशिष्ट योग्यताएँ (Specific Ablities)
1. गृह विज्ञान के प्रयोग करने की क्षमता
2. प्रयोगशाला संचालन की योग्यता
3. विभिन्न शिक्षण विधियों का ज्ञान
4. अन्य विषयों का ज्ञान
5. नवीन मूल्यांकन प्रणाली का ज्ञान ।
6. गृह विज्ञान की पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाओं का ज्ञान
7. वैज्ञानिक दृष्टिकोण ।
8. बाल मनोविज्ञान का ज्ञान
9. वैज्ञानिक संस्कृति का ज्ञान ।
अ) सामान्य योग्यताएँ (General Ablities)
1. स्वस्थ व्यक्तित्व -
स्वस्थ व्यक्तित्व से तात्पर्य एक ऐसे व्यक्तित्व से है जो शारीरिक, मानसिक, एवं नैतिक दृष्टिकोण से समायोजित हो। स्वस्थ व्यक्तित्व का छात्राओं के ऊपर प्रत्यक्ष पड़ता है। आध्यापिका के इस गुण को छात्राएँ अप्रत्यक्ष रूप से अनुकरण करने लगती है।
2. नेतृत्व क्षमता -
शिक्षा एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है इसकी निरन्तरता की उपादेयता इसके द्वारा ग्रहित मार्ग पर निर्भर करती है। अध्यापिका ही इसे उपयुक्त दिशा प्रदान कर सकती है। इस कारण छात्राओं की शक्ति को दिशाविहिन होने के रोकने के लिये एवं उसको वांछित धाराओं में मार्गन्तीकरण हेतु उसमें सबल नेतृत्व के गुण का होना आवश्यक है।
3. आत्मविश्वास :-
अध्यापिका में आत्म विश्वास का होना अति आवश्यक है। जीवन में अनेक प्रकार की समस्याओं का आना स्वाभाविक है जिनका हल पहले से नहीं होता है ऐसी स्थिति में आत्मविश्वास का होता ही उसकी उन परिस्थितियों के समायोजन में सहायक हो सकता है।
4. सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार:-
अध्यापिका और छात्राओं में सौहार्दपूर्ण सम्बन्धों का होना अन्य विषयों की अपेक्षा कृह विज्ञान में अधिक आवश्यक यह व्यवहार कठोर होता है शिक्षक का तो ऐसी स्थिति में जिज्ञासा तृप्ति का प्रश्न नहीं उठता। इसी कारण अध्यापिका का व्यवहार प्रेमपूर्ण एवं सहानुभूति पूर्ण होनी चाहिए।
5. निष्पक्ष दृष्टिकोण:
गृह विज्ञान अध्यापिका की एक प्रमुख विशेषता छात्राओं को परिस्थितियों के निष्पक्ष रूप से अवलोकन करने की आदत डालना है यदि स्वयं में निष्पक्षता का अभाव है तो यह स्वयं ही पूर्वाग्रही से ग्रसित हो जायेगी। छात्राओं में इस गुण को विकसित करने में पूर्णतया असफलता रहेगी।
6. स्पष्टवादिता :-
गृह विज्ञान का प्रमुख उद्देश्य ही शाश्वत सत्य की प्राप्ति है। वैज्ञानिक किसी भी चीज अथवा सिद्धान्त को तब तक समान मानने को तत्पर नहीं होता जब तक कि वस्तुनिष्ठ तरीके से उसको सत्यापित न कर ले। इस दृष्टिकोण से उसमें स्पष्टवादिता का होना अत्यन्त आवश्यक गुण है।
7. अध्ययनशील :-
गृह विज्ञान अध्यापिका के लिये यह और आवश्यक है कि वह गृह विज्ञान की नवीनतम खोजों से परिचित हो। तभी वह अपनी छात्राओं को इस तेजी से परिवर्तनशील समाज के साथ समायोजित करा सकने में सक्षम हो सकेगी। इस प्रकार गृह विज्ञान अध्यापिका को किसी भी सिद्धान्त को सदैव के लिये सत्य व अपरिवर्तनशील नहीं मानना चाहिये। यह तभी संभव है। जबकि वह सदैव नवीन ज्ञान के प्रति सजग रहे, अध्ययनरत रहे।
ब) विशिष्ट योग्यतायें
1. गृह विज्ञान के प्रयोग करने की क्षमता
गृह विज्ञान शिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष "प्रयोग" है। इसी के माध्यम से अध्यापिका छात्राओं में रूचि उत्पन्न करती है। सामान्यीकरण कर सकने की स्थिति उत्पन्न कर सकती है, पूर्ण निर्धारित तथ्यों की छात्राओं के सम्मुख स्थापित कर सकती है। अतः गृह विज्ञान अध्यापिका के प्रयोग करने में दक्ष होना चाहिये।
2. प्रयोगशाला संचालन की योग्यता:
गृह विज्ञान अध्यापिका का अधिक समय प्रयोगशाला में व्यतीत होना है। प्रत्येक गृह विज्ञान अध्यापिका को अपनी प्रयोगशाला की तरीके से व्यवस्था करने तथा उसमें कार्य करने की पूर्ण योग्यता होनी चाहिये।
3. विभिन्न शिक्षण विधियों का ज्ञान
गृह विज्ञान विषय की अपनी विशिष्ट प्रकृक्ति है। इसमें प्रयुक्त होने वाली विधियां विशेषता योजना, अन्वेषण, प्रयोग, प्रदर्शन आदि इसकी इसी प्रकृति को दृष्टिगत रखते हुए बनाई गयी। गृह विज्ञान अध्यापिका को इन विधियों के प्रयोग का समुचित ज्ञान होना चाहिए।
4. अन्य विषयों का ज्ञान :-
गृह विज्ञान में समन्वय का अपना विशिष्ट महत्व है। गृह विज्ञान अध्यापिका को किसी भी पाठ्य-वस्तु की समन्वित रूप से पढ़ाने के लिये यह आवश्यक है कि उसे विभिन्न विषयों का ज्ञान हों। समन्वित पाठ के अतिरिक्त इस गुण के फलस्वरूप वह छात्राओं को जिज्ञासा का अधिक प्रभावशाली ढंग से समाधान कर सकेगी।
5. नवीन मूल्यांकन प्रणाली का ज्ञान
उद्देश्यों की प्राप्ति के साक्षी स्वरुप-मूल्यांकन शिक्षण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण भाग है किन्तु यदि मूल्यांकन विश्वसनीय एवं वैद्य नहीं है, तो उपरोक्त लक्ष्य पूरे नहीं हो सकेंगे। इसलिये मूल्यांकन की नवीनतम प्रणालियों का ज्ञान चाहिए।
6. गृह विज्ञान की पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाओं का ज्ञान
गृह विज्ञान की पाठ्यक्रम सहगामी क्रियायें जैसे- गृह विज्ञान क्लब का आयोजन, पर्यटन का आयोजन, विज्ञान संग्रहालय आदि। अध्यापिका को इन क्रियाओं के उचित ढंग से संगठन में प्रवीण होना चाहिए। जिससे उनका उचित लाभ उठाया जा सके।
7. वैज्ञानिक दृष्टिकोण -
छात्राओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की कई विशेषताओं को उत्पन्न करने के लिये यह विभिन्न स्थितियों का प्रयोग करने में सक्षम होना चाहिये। इसके अतिरिक्त वह वैज्ञानिक दृष्टिाकेण के विभिन्न तत्वों को अपने व्यक्तित्व में समाहित करके और उनके व्यावहारिक प्रयोग द्वारा अपना व्यक्तिगत उदाहरण प्रस्तुत कर सकती है।
8. बाल मनोविज्ञान का ज्ञान
गृह विज्ञान अध्यापिका को बाल मनोविज्ञान का ज्ञान होना भी आवश्यक है। छात्राओं की व्यक्तिगत भिन्नता, वातावरण का प्रभाव, अधिगम प्रणाली से सम्बन्धित सिद्धान्तों का भी वह प्रभावशाली ढंग से प्रयोग करने में सक्षम हो सकेगी।
9. वैज्ञानिक संस्कृति का ज्ञान
गृह विज्ञान के विकास का क्रम एवं विभिन्न वैज्ञानिकों का वैज्ञानिक ज्ञान में योगदान एवं इसका मानव संस्कृति पर प्रभाव आदि इस क्षेत्र के अन्तर्गत आते है। अध्यापिका को इनसे सम्बन्धित तथ्यों एवं सिद्धान्तों का ज्ञान होना चाहिये।
नयी शिक्षा नीति की दृष्टिगत रखते हुए NCERT ने अपने वृहत सेवारत शिक्षक अभिनवीकरण सर्वप्रथम 1988 में गृह विज्ञान शिक्षिका में निम्न गुर्णो का होना अनिवार्य है -
1. अभिव्यक्ति की सुस्पष्टता एवं अभिव्यक्ति के विविध रूप।
2. उत्साह एवं उपलब्धिजनक व्यवहार।
3. पहले से तैयारी ।
4. छात्रों के कार्यों को मान्यता देना, उन्हों प्रोत्साहित करना।
5. रचनात्मक आलोचना एवं सुझाव देने की क्षमता।
6. साराशं प्रस्तुत करने की क्षमता।
7. विविध प्रश्न करने की क्षमता एवं उत्तरों के मूल्यांकन की क्षमता।
8. जानकारी देने में कठिनाई को समझने की क्षमता।
इस प्रकार हम देखते है कि एक अच्छी शिक्षिका का प्रभाव गृह विज्ञान शिक्षण के प्रत्येक क्षेत्र पर पड़ता है। गृह विज्ञान के क्षेत्र में यह उक्ति "शिक्षक जन्म से नहीं होता है बल्कि निर्मित किया जाता है। उचित हैं"?

