भोजन के आवश्यक पोषक तत्व कौन-कौन से हैं? उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
भोजन के आवश्यक पोषक तत्व ( Essential nutrients in food ) भोजन के आवश्यक पोषक तत्व निम्नलिखित है-
1. ऊर्जा प्रदान करने वाले भोज्य पदार्थ
अ. अनाज
ब. वसा
स. शर्करा
2. शरीर निर्माण करने वाले भोज्य पदार्थ
अ. प्रोटीन
ब. दूध तथा दूध से बने उत्पाद
3. सुरक्षा भोज्य पदार्थ
अ. फल
ब. सब्जियाँ
स. हरे पत्तेदार सब्जियाँ
द. अन्य पोषक तत्व जल तथा रुक्षांस
प्रोटीन-
प्रोटीन में कार्बन और ऑक्सीजन के अलावा नाइट्रोजन, गंधक और कुछ अन्य तत्व भी होती है। यह एक रासायनिक सम्मिश्रण है, जिसमें 22 यौगिक होते है, जिसे एमिनो अम्ल कहते है। ये दस एमिनो अम्ल शरीर के लिए अति आवश्यक है प्रोटीन को खाद्य पदार्थों की प्राप्ति के आधार पर निम्न श्रेणियों में रखा गया है।
अ. पशुजन्य जांच
ब. वनस्पति जन्म प्रोटीन
पशु जगत से प्राप्त भोज्य पदार्थो में दूध से बने पदार्थ, मांस, मछली, अण्डे आदि पशु प्रोटीन कहलाता है इसमें अधिकाधिक अनिवार्य एमिनों अम्ल रहते हैं, जो कि वनस्पति प्रोटीन से उत्तम होते है वनस्पति जगत से प्राप्त भोज्य पदार्थो में वनस्पत प्रोटीन होते हैं जिसमें अनिवार्य एमिनो अम्ल बहुत कम होते है। केवल सोयाबीन वनस्पति प्रोटीन का उत्तम साधन है।
प्रोटीन के कार्य-
प्रोटीन के निम्नलिखित कार्य है-
(अ) नवीन तन्तु कोशिकाओं का निर्माण करना।
(ब) तन्तु कोशिकाओं की मरम्मत करना
(स) तन्तु कोशिकाओं की वृद्धि करना
(द) मानसिक शक्ति बढ़ाना
(य) रोग निवारण शक्ति देना
(र) ऊर्जा और उष्मा का उत्पादन करना
(ल) हार्मोन का निवारण करना।
(व) पाचक रसों का निर्माण करना
(श) शरीर का उत्तम गठन होना
(ह) त्वचा को स्वस्थ रखना।
प्रोटीन प्राप्ति के साधन-
मंसूर, मटर, मूंग, अरहर, चने की दाल, अंकुरित तथा साधारण अनाज हरी सब्जियाँ, दूध, मक्खन, पनीर, मांस, मछलिया, अण्डे आदि। शाकाहारी भोजन में दूध हो उत्तम प्रोटीन का स्रोत है।
कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate)
कार्बोहाइड्रेट में कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन होते है। ये शर्करा और श्वेतसार के रूप में रहते है। यह उष्मा और ऊर्जा का उत्पादन कर शरीर को शक्ति देते हैं। कार्बोहाइड्रेट चार प्रकार के होते है।
(a) मोनो सैक्राइड्स
(b) डाइ सैक्राइड्स
(c) ट्राई सैक्राइड्स
(d) पॉली सैक्राइड्स
कार्बोहाइड्रेट के कार्य ( Functions of carbohydrates )
कार्बोहाइड्रेट के निम्नलिखित कार्य है।
(अ) शरीर में ऊर्जा और ऊष्मा उत्पन्न करना।
(ब) पेशियों का निर्माण करना।
(स) शरीर के ताप की स्थिरॉक (90°F) पर रखना।
(द) श्रम के लिए ऊर्जा तथा शीत ऋतु में उष्मा प्रदान करना।
(घ) शरीर की अत्यधिक आवश्यकता के लिए ग्लाइकोजन के रूप मैं संचित रहना।
कार्बोहाइड्रेट की प्राप्ति के साधन (Source of Carbohydrate)
काबर्बोहाइड्रेट सभी अनाओं जैसे गेहूँ, मक्का, जौ, चावल, साबूदाना, ज्वार, बाजरा और आलू में पाये जाते है। साथ ही मधु, गन्ने, चीनी, गुड़, खजूर, अंगूर, चुकन्दर, शकरकन्द, मिश्रिकन्द अन्य फलों तथा दूध में पाये जाते हैं। चावल तथा अनाओं के छिलकों में अत्यधिक होते है।
वसा (Fat) -
बसा में कार्बन, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन होते है। वसा के दहन से शरीर में शक्ति और गर्मी प्रदान करने की क्षमता है। यह चर्बीदार अम्ल और ग्लिसरीन का मिश्रण होता है।
वसा के कार्य (Function of Fat)
वसा के निम्नलिखित कार्य है-
अ. शरीर को उष्मा और ऊर्जा प्रदान करना।
ब. शरीर की बाहरी रचना को सुडौल और सुसंगठित रूप देना।
स. शरीर की चिकना रखना।
द. विटामिनों की प्राप्ति करना एवं शीत ऋतु से रक्षा करना।
वसा प्राप्ति के साधन (Source of fat)
वसा, सरसो, नारियल, मूँगफली, तिल बादाम, सूखे मेवे, मछली, चर्बी, अंडे, घी, मक्खन आदि से प्राप्त होते हैं।
खनिज लवण (Mineral Salts)
खनिज लवण शारीरिक विकास, जीवन सम्बन्धी क्रियाओं की नियमितता और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। साधारण नमक, कैल्शियम कार्बोनेट, कैल्शियम फॉस्फेट, सोडियम, फॉस्फेट, लोहा, आयोडीन, कॉपर आदि खनिज लवण के ही रूप है।
(a) कैल्शियम (Cal)
अस्थियों और दाँतों को स्वस्थ रखकर उनका विकास और बुद्धि तथा शक्ति को शक्तिशाली बनाता है। पेशी की क्रियाशीलता रक्त और हृदय के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है तथा संक्रामक रोगों से रक्षा करता है।
(b) फॉस्फोरस (Phorphorus)
अस्थियों, दांतों, रक्त तथा तंत्रिका तन्त्र को स्वस्थ रखता है तथा शारीरिक विकास में भी सहायक होता है।
(c) लोहा (Fe) -
रक्त के लाल कणों के लिए आवश्यक होता है।
(d) आयोडिन नमक
थायराइड ग्रन्धि को समुचित क्रियाशीलता के लिए आवश्यक होता
(e) साधारण नमक
पाचन तंत्र की उचित क्रियाशीलता और कार्यक्षमता को बनाए रखता है।
(f) पोटैशियम
अस्थियाँ, दाँतों कोशिकाओं, रक्त तथा तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखना।
(g) गंधक
बालों और नाखूनों को स्वस्थ रखना।
(h) सोडियम कार्बोनेट
रक्त की वृद्धि, शरीर में अम्ल क्षार को संतुलित रखना, पाचक रसों का निर्माण करना तथा विकारों का उत्सर्जन करनां
(I) क्लोरिन
खनिज लवण (Mineral Salts) प्राप्ति के साधन
कैल्सियम -
लोहा-
दाल, अंडे, बाजरा, खजूर, खीरा, गाजर, साग, पुदीना, माँस, मछली, सेब, मटर, सूखे मेवे फल आदि।
फॉस्फोरस-
पनीर, अंडे, माँस, पत्तागोभी, पालक, मछली, दाल, बादाम, तिल, मूंगफली, सोयाबीन, आलू, मुनक्के, दही, सेब आदि।
आयोडिन-
मछली, हरी पत्तेदार सब्जी, लहसुन, प्याज, नीबू, मूली आदि।
मैग्नीशियम-
मूली, खीरा, गाजर, प्याज, माँस, शलजम, फूलगोभी, आलू, टमाटर, पालक
पोटैशियम-
हरी सब्जियाँ
गन्धक-
माँस, अंडे, पालक, दाल, सेब, प्याज, दूध, शलजम, सलाद, मूली आदि।
क्लोरीन-
टमाटर, पालक, खजूर, कीक, केला, चोकर, अन्नास आदि।
विटामिन ( Vitamin )
शरीर को निरोग रखने के लिए विटामिनों का होना अनिवार्य है। खाद्य पदार्थों को उबालने और तलने के साथ सुखाने से विटामिन नष्ट हो जाते है, यह अधिक ताप सहन नहीं कर सकते है। खाने वाले सोडे के प्रयोग से भी विटामिन समाप्त हो जाते हैं, अभी तक 15 प्रकार के विटामिन ज्ञात हुए है। विटामिन बी सबसे बड़ा परिवार है।
विटामिन (Vitamin) दो प्रकार का होता है।
जल में घुलनशील (Water Soluble)
वसा में घुलनशील (Fat Soluble)
Vitamin A-
(a) शरीर की वृद्धि करना।
(b) नेत्रों को स्वस्थ रखना
(c) पाचन क्रिया ठीक रखना।
(d) श्वसन तंत्र स्वस्थ रखना
(e) अस्थियों तथा दाँतों को स्वस्थ रखना।
Vitamin B-
चयापचय के लिए शरीर में ऊर्जादायक पदार्थों को आत्मसात करने में सहायक होना, तंत्रिका तंत्र सम्बन्धि रोगों से बचाव करना, पाचन शक्ति बढ़ाना रक्त एवं शरीर की वृद्धि के लिए सहायक होना, बेरी-बेरी तथा पैलेग्रा रोगों से रक्षा करना।
Vitamin C-
दांतों एवं मसूढ़ों को स्वस्थ रखना, रक्त को शुद्ध करना, अमाशय को रोगमुक्त रखना, रक्त वाहिनियों को स्वस्थ रखना, शारीरिक स्फूर्ति रखना, संक्रामक रोगों से रक्षा करना। तथा स्कर्वी रोग से भी रक्षा करना।
Vitamin D-
अस्थि की निर्बलता दूर करना, अस्थियों को स्वस्थ रखना तथा वृद्धि करना, अस्थियों तथा दाँतों को मजबूत बनाना, संक्रामक रोगों से बचाव तथा रिकेट रोगों से भी रक्षा करना।
Vitamin E-
प्रजनन तंत्र को स्वस्थ रखना।
Vitamin K-
रक्त स्त्रोत रोकना।
Vitamin P
रक्त कोशिकाओं की पारगम्यता बढ़ाना।
विटामिन प्राप्ति के साधन-
विटामिन A -
घी, मक्खन, क्रीम, दूध, अण्डे, कर्ड, शार्क, मछली, गाजर, मटर, पालक, सेब, नारंगी, टमाटर, सलाद, गोभी, लहसुन, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, केला, पपीता आदि।
विटामिन B -
छिलके सहित अनाज, ताजे फल, खमीर, गेहूँ, अण्डे, साग सब्जी, सूखे मटर, फल, माँस, मछली, दूध, कलेजी और चने, चावल के छिलके, मेवे आदि।
राइबोफ्लोविन-
सूखी खमीर, दूध चूर्ण, अण्डे, कलेजी, पनीर, हरी सब्जिया, मछली, यकृत, मूंग, उरद, चना, मंसूर आदि।
निकांदिन अम्ल-
अण्डे, छिलके सहित अनाज, खमीर, माँस, कच्छी मूंगफली आदि।
Folicacid-
खमीर, पालक, यक्त, हरी सब्जियाँ आदि।
Vitamin B-
दूध, कलेजी, माँस, अण्डे, मछली, यकृत आदि।
बायोटिन-
यकृत, व्रिक, अण्डे,चाश्मि, काष्ठ कुंभी आदि।
Vitamin C-
रसदार फल, टमाटर, हरी सब्जियाँ, आवला, नींबू, नारंगी, गाजर, प्याज, अमरूद, अंगूर, सेब, अन्नानाश, बन्दगोभी हरीमिर्च, शलजम, अंकुरित अनाज आदि।
Vitamin D-
सूर्य की किरणों, ताजे फलों सब्जियाँ, दूध, अण्डे, दही, मछली, मक्खन, कलेजी, मछली के तेल (कार्ड और शार्क) आदि।
Vitamin E-
अंकुरित अनाज गेहूँ, मांस, दूध, अण्डे, फल, मक्खन, मेवे, पनीर हरी सब्जियाँ नारियल तेल बिनौले तेल आदि।
Vitamin K-
पालक, साग, फूलगोभी, पत्ता गोभी, शलजम, टमाटर, आलू, गेहूँ का चोकर आदि।
Vitamin P-
फल हरी सब्जियां, मांस, मछली, अण्डा, दूध, अंकुरित अनाज, दाले आदि।
जल (Water) -
जल H₂ तथा O₂ का यौगिक है। जल मानव शरीर की प्रत्येक कोशिका में उपस्थित होता है यह शरीर में सभी खाद्य पदार्थों तथा शरीर के अन्दर ऑक्सीकरण की क्रिया द्वारा उत्पन्न होता है। रोटी में यह 60-70% तक शाक भाजी में 90% पाया जाता है। पाचक रसों के निर्माण तथा रक्त की तरलता के लिए यह आवश्यक है। विकारों का सहज निष्कर्ष जल द्वारा होता है।
जल के कार्य (Function of Water)-
(a) पचे हुए भोजन को घोलना तथा शोषित होने के लिए शरीर के प्रत्येक अंक में तरलावस्था में पहुंचाना।
(b) शरीर के तापक्रम को स्थिर रखना।
(c) यूरिक अम्ल को बाहर निकलना।
(d) मल-मूत्र पसीना आदि के रूप में बाहर निकालना।
(e) शरीर के प्रत्येक ऊतक को लचीला तथा मुलायम रखना
(f) पचे पाचक रसों तथा अन्य स्त्रोतों की तरलता को बनाए रखना।
रूक्षांश-
भोजन के पाचन तथा आँतों की गति के लिए रेशे आवश्यक है भोज्य पदार्थों के रेशों बीजों शल्कों और छिलकों से रूक्षांश प्राप्त होते है। यह पोषक तत्व तो नहीं है किन्तु भोजन पाचन में अवशिष्ट निष्कासन तथा सभी तत्वों के अवशोषण में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहता है शरीर को पोषक तत्वों को निरन्तर आपूर्ति में सहायक होता है।

