पाक क्रिया का अर्थ स्पष्ट कीजिए। इसकी विभिन्न विधियों का संक्षेप में वर्णन करें?
पाक क्रिया (Cooking Process):
कच्चे भोज्य पदार्थों को खाने योग्य बनाने की कला को पाक क्रिया कहते है। पाक क्रिया विश्व की प्राचीनतम कलाओं में से एक है। विश्व के अलग-अलग क्षेत्रों में निवास करने वाले लोग, अलग-अलग तरह के खाद्य पदार्थों का तथा अनेकोनेक पकाने की विधियों का प्रयोग करते है। एक ही खाद्य पदार्थों को लोग अलग-अलग विधियों से विभिनन रूपों में बनाकर प्रयोग में लाते हैं।
भोजन पकाने की आवश्यकता-
1. भोजन को सुपाच्य बनाना,
2. भोजन को स्वादिष्ट व आकर्षक बनाना व उसके रूप में सुधार लाना।
(अ) रूप व आकार में परिवर्तन
(ब) रंग में परिवर्तन
(स) बनावट में परिवर्तन
(द) स्वाद एवं गन्ध में परिवर्तन
3. भोजन के रोग जीवाणुओं को नष्ट करना।
4. भोजन में विभिन्नता लाना।
भोजन बनाने की विधियाँ :-
आदि मानव को भोजन पकाने का ज्ञान नहीं था इसलिए वे अपनी भूख मिटाने के लिए जो कुछ भी उपलब्ध था वही उसी दशा में ग्रहण कर लेता था। उसे पाकक्रिया का ज्ञान नहीं था। कच्छी अवस्था में ही प्रत्येक सामग्री को ग्रहण कर लेता था।
धीरे-धीरे सभ्यता के विकास के साथ मानव ने अपने आहार ग्रहण करने के तरीके क्रमशः परिवर्तन किया। आज भोजन पकाने की अनेक विधियाँ प्रचलित हुई जिससे कम से कम पोषक तत्वों को हानि होती है और उसका पोषण मूल्य बना रहता है। भोजन पकाने में रंग गन्ध स्वाद सभी पर ध्यान दिया जाने लगा ताकि यह अधिक सुगन्धमय तथा स्वादिष्ट हो सके और अधिक संतुष्टि प्रदान करे।
1. जल द्वारा पकाना
उबालना
सिमरिंग
स्टयूइंग
2. हवा द्वारा पकाना
भुनाना व बेकिंग
ग्रिलिंग व बायलिंग
3. वाष्प के माध्यम से पकाना
वाष्प के दाब द्वारा पकाना या प्रेशर कुकिंग
पकाने की प्रत्यक्ष विधि
वफाने की अप्रत्यक्ष विधि
4. चिकनाई द्वारा पकाना
तलने की उथली विधि
तलने की गहरी विधि
तलने की शुष्क विधि
पैनिंग या स्टार फ्राइंग
1. जल द्वारा पकाना-
इस विधि से पकान पर भोजन पूरी तरह से जल में घिरा रहता है। इस विधि को भी जल की मात्रा व तापक्रम की ध्यान में रखते हुए तीन भागों में बांटा गया है।
(a) उबालना-
पानी 100°C या 212°F ताप पर उबलता है। भोजन पकाने की इस विधि में भोजन पूरी तरह से पानी में घिरा रहता है तथा पानी में निरन्तर उबलने की क्रिया होती रहती है। इसमें भोजन को ढककर उबाला जाता है। इससे ताप कम नष्ट होता है तथा भोजन जल्दी पक जाता है।
इस विधि से पकाने पर पोषक तत्व उबलकर पानी में आ जाते हैं, अतः अतिरिक्त पानी को फेंकना नहीं चाहिए। उसका भी प्रयोग कर लेना चाहिए। इस विधि में पकाया गया भोजन सुपाच्य होता है कम खर्चीला होता है, जल्दी बनता है।
(b) सिम्परिंग-
सिमरिंग व पेचिंग विधि का प्रयोग करके खाद्य पदार्थों को पर्याप्त पानी में उबालने के तापक्रम से कुछ निचे 85°C 90°C तक पकाया जाता है। इसमें पानी के बुलबुले पानी की सतह तक आने से पहले ही फट जाते हैं। खीर इसी विधि से बनाई जाती है। इस विधि में अधिक समय लगता है।
(c) स्ट्यूडंग-
यदि भोजन, पानी व ताप दोनों ही बहुत कम रखे जाएँ तो यह विधि स्ट्यूडंग कहलाती है। इस विधि में पानी का ताप सिमरिंग विधि से पकाने के ताप से कम होता है। इसका तापक्रम 180°F या इससे भी कम रखा जाता है। इस विधि से भोजन ढककर तथा पानी कम रखा जाता है। इस विधि से पाचन में अधिक समय लगता है। इस विधि को अपनाने पर पोषणयुक्त भोजन रहता है। मांस तथा सूखी सब्जी विशेष रूप से पकाई जाती है।
2. हवा द्वारा पकाना-
जब पाक क्रिया गर्म हवा के माध्यम से सम्पन्न होती है तो उसे वायु द्वारा पकाता कहते है। इस विधि में हवा के साथ कोई अन्य धातु धातु अथवा उष्मा के चालक भी भोज्य पदार्थ को पकान में सहायता करते है, जैसे- राख, रेत, बालू आदि।
(a) भूनना व बेकिंग -
दोनों विधि एक ही है। इसमें तापक्रम 120° से 260° तक रखा जाता है। रोस्टिंग का अर्थ है बिना ढके हुए शुष्क गर्मी प्रदान कर पकाना रोस्टिंग ओवन में भी होती है। आमतौर पर मीट को ओवन में पकाने को रोस्टिंग कहते है अन्य चीज जैसे ब्रेड, केक, बिस्कुट आदि की ओवन में पकाने को बेकिंग कहा जाता है। रोस्टिंग व बेकिंग में पकाने की क्रिया आंशिक रूप में शुष्क ताप व आंशिक रूप से आर्द्र ताप पर निर्भर करती है। खाद्य पदार्थों में उपस्थित आंर्द्रता गर्मी पाकर वाष्प में बदल जाती है व खाद्य पदार्थों को नम बनाये रखने में सहायक होती है।
(b) ग्रिलिंग व ब्रायलिंग
इसमें खाद्य पदार्थ को प्रत्यक्ष रूप से ताप के या आग के सम्पर्क में लाया जाता है यह क्रिया विशेष रूप से उपकरण द्वारा की जाती है। इस उपकरण को ब्रायलर या ग्रिलर कहा जाता है। ब्रायलर तथा गिलर में गर्मी के संचालन द्वारा कुछ मात्रा में विकिरण द्वारा पाक क्रिया सम्पन्न होती है। नमी खाद्य सामग्री को इस विधि द्वारा पकाया जाता है। वायु के माध्यम से विभिन्न विधियों द्वारा जिन खाद्य पदार्थों को पकाया जाता है उसमें प्रमुख है रोटी, नॉन ब्रेड, केक, पेस्ट्री, बिस्कुट, मीट, फिश इत्यादि।
3. वाष्प के माध्यम से पकाना
वाष्प के माध्यम से भोजन पकाने में आर्द्र उष्मा का प्रयोग होता है। वाष्प के द्वारा भोजन पकाने के लिए प्रत्यक्षव अप्रत्यक्ष दोनों तरह की विधियों का प्रयोग होता है। कई वार वाष्प के दबाव द्वारा ही भोजन पकाया जाता है।
(a) वाष्प के दाब द्वारा पकाना या प्रेशर कुकिंग-
इस विधि में पहले वाप्र उत्पन्न की जाती है। फिर दबाव द्वारा उष्मता का घनत्व बढ़ाया जाता है पकाने के लिए लगने वाला समय घट जाता है। इस विधि में खाद्य सामग्री के पोषक तत्व की भी कम हानि होती है। इस विधि में पहले उष्मा वाष्प के द्वारा खाद्य सामग्री तक ले जाई जाती है जहाँ वाष्प ठण्डी सामग्री के सम्पर्क में आकर संघनित हो जाती है।
यह क्रिया तब तक चलती रहती है जब तक खाद्य सामग्री का तापक्रम बढ़कर वाष्प के बराबर 100°C न हो जाये। अब संघनन की प्रक्रिया घटती जाती है तथा वाष्प का दबाव प्रेशर कुकर में बढ़या जाता है। यह दाव अपनी इच्छानुसार बढ़ाया जा सकता है इसका दबाव भोज्य पदार्थों के दबाव पर निर्भर करता है। वाष्प के द्वारा पकने की चाहे किसी भी विधि का चयन किया जाता है खाद्य सामग्री एकदम हल्की व पचने में आसान होती है। भोजन पकान में समय भी कम लगाता है।
(b) बफाने की अप्रत्यक्ष विधि
इस विधि में खाद्य सामग्री प्रत्यक्ष रूप से भाप के सम्पर्क में नहीं आती है इसके लिए दोहरी दीवार वाले स्टीमर का प्रयोग करते हैं। भीतर की ओर पानी भर दिया जाता है व अन्दर की ओर खाद्य सामग्री रखी जाती है। पानी को गर्म करने पर वाष्प से अन्दर की दीवार गर्म हो जाती है। खाद्य सामग्री अप्रत्यक्ष रूप से गर्मी पाकर पकती है।
4. चिकनाई द्वारा पकाना -
इस विधि में भोज्य पदार्थों को चारों ओर से किसी चिकनाई जैसे घी, तेल, रिफाइण्ड से पकाया जाता है। उष्मा पहले चिकनाई द्वारा ग्रहण की जाती है। फिर चिकनाई उष्मा की अवशोषित कर लेती है और गर्म होकर भोज्य पदार्थ को पकाती है। इस विधि में पकाने पर भोजन गरिष्ठ हो जाता है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित विधियों द्वारा वसा की मात्रा को ध्यान में रखकर पकाया जाता है।
(i) तलने की उथली विधि-
इस विधि का प्रयोग करने के लिए कम वसा या घी का उपयोग होता है। इस विधि में खाद्य सामग्री को तवे पर या फ्राइंग पैन में कवल इतनी चिकनाई डालकर पकाया जाता है कि वह चिपके नहीं। एक तरफ खाद्य सामग्री पक जाने पर उसे दूसरी तरफ पलटकर रोका जाता है, इसमें ताप को भी कम रखा जाता है।
(ii) तलने की गहरी विधि
इस विधि में तेल या घी इतनी मात्रा में डाली जाती है कि भोज्य पदार्थ डूब जाये। गहरी तलने की क्रिया कढ़ाई में की जाती है। तलते समय तेल व घी का तापक्रम तेज होना चाहिए। अन्यथा भोज्य पदार्थ घी को बहुत सोख लेता है।
(iii) तलने की शुष्क विधि
इस विधि में बाहरी वसा का प्रयोग नहीं किया जाता है। इस विधि से उन्हीं भोज्य पदार्थों को पकाया जाता है जिसमें प्राकृतिक रूप से वसा रहती है। यह वसा पकाते समय पिघलकर बाहर आ जाता है और भोजन पकाने में सहायता करती है तथा खाद्य सामग्री को चिपकने से बचाती है। इस विधि से खोआ को भूनना, मूंगफली भूनना, वास्तव में तलने की शुष्क विधि है। माँस तथा मछली भी इस विधि से पकायी जाती है।
(iv) पैनिंग या स्टरफ्राइंग
इस विधि में अक्सर सब्जियों को पकाया जाता है। कढ़ाई या फ्राईपैन में थोड़ी सी वसा डालकर उसमें कटी हुई सब्जियाँ डालकर थोड़ी-थोड़ी देर में उसे हिलाया जाता है। कुछ सब्जियों को ढक कर तथा कुछ को बिना ढके इस विधि से पकाया जाता है। कई बार आवश्यकता पड़ने पर थोड़ा सा पानी भी डाला जाता है, जो जलने से बचाता है। किसी भी आहार को पकाने के लिए वही विधि अपनानी चाहिए जो आहार के निहित उद्देश्यों के लिए सर्वाधिक उपयोगी एवं सुविधाजनक हो।

