एक उत्तम परीक्षण की क्या विशेषताएँ हैं? || Characteristics of a good test

एक उत्तम परीक्षण की विशेषताएँ - Characteristics of a good test


एक उत्तम परीक्षण की क्या विशेषताएं एवं गुण होने चाहिए जिससे वह अपने उन उद्देश्यों की पूर्ति में पूरी सफल सिद्ध हो सके, जिनके लिए उसका निर्माण किया गया है। संक्षेप में उसकी इस प्रकार की विशेषताओं को निम्न प्रकार लिपिबद्ध किया जा सकता है -


1. विषयानुकूलता -

अच्छा परीक्षण वही माना जाता है जो विषय के अनुकूल हो अर्थात् उसके द्वारा वही मापा जाय, जिसे मापने के लिए उसे प्रयोग में लाया गया हो। इस तरह जीव विज्ञान के उत्तम परीक्षण को विषयानुकूल तभी कहेंगे, जबकि उसके द्वारा हम जीव विज्ञान संबंधी योग्यता को ही मायें।


2. विश्वसनीयता:

किसी पर विश्वास उसके व्यवहार में यथार्थता और एकरूपता के कारण ही होता है। स्विट्जरलैण्ड के अनुसार "विश्वसनीयता से तात्पर्य श्रद्धा से है जो एक परीक्षा मे स्थापित की जा सकती है।" जैसे अगर एक घड़ी ठीक समय देती है तो कई बार परीक्षण करने पर उस पर अनायास ही विश्वास जम जाता है।


इसी प्रकार अगर किसी परीक्षा में विद्यार्थी की योग्यता का यथार्थ रूप से मूल्यांकन करने से उसमें कोई अन्तर नहीं आता तो उसे हमें विश्वसनीय कहेगें। अंगर एक बार परीक्षा देने में परीक्षक किसी छात्र को 100 से 60 अंक देकर उच्च स्तर का घोषित करे तथा दूसरी बार वही परीक्षक उसी परीक्षार्थी को 100 में से 40-50 अंक देकर सामान्य स्तर का घोषित करे तो ऐसी परीक्षा कभी भी विश्वसनीयता नहीं हो सकती।


3. वस्तुनिष्ठता

इसका अर्थ यह है कि किसी भी प्रश्न का उत्तर देते समय विद्यार्थी और जांच करे समय परीक्षकगण अपनी-2 रुचियों, भावनाओं तथा जानकारी को ही महत्व देते हुए अगर अपने उत्तर को अपने रंग में न रंग सकें तो यह परीक्षण वस्तुनिष्ठ कहलाता है। अगर किसी परीक्षा में छात्र की अपनी रूचि, भावनाओं तथा व्यक्तिगत दृष्टिकोण का प्रतिबिम्ब उत्तर देने में न पड़े और अध्यापक का व्यक्तिगत पक्षपात उसकी मानसिक अवस्था रुचि और भावनाओं का प्रभाव छात्रों के अंकों पर न पड़े, तो वह परीक्षण वस्तुनिष्ठ कहलाता है।


किसी भी परीक्षा की वस्तुनिष्ठता उसके प्रश्नों को देखकर आसानी से पहचाना जा सकती है। अगर प्रश्नों का उत्तर संक्षिप्त और प्रत्येक परिस्थिति में एक सा ही हो और उस पर व्यक्तिगत दृष्टिकोण पसंद-नापसंद तथा भावनाओं का कोई प्रभाव न पड़ें, तो वह परीक्षा वस्तुनिष्ठ कही जा सकती है।


4. समुचितवरण

उत्तम परीक्षण का उद्देश्य पूर्व में पढ़ाई गई सभी बार्तों के बारे में यह पता लगाना होता है कि विद्यार्थी उनको ठीक प्रकार से समझ पाए है अथवा नहीं तथा उनमें कितनी योग्यता और ज्ञान में वृद्धि हुई है। अतः परीक्षण ऐसा होना चाहिए कि इस दिशा में वह अधिक से अधिक जांच कर सके, उसमें सभी प्रकरणों, प्रकरणों के सभी अंशों तथा अन्य उपयोगी ज्ञान की उचित ज्ञान की क्षमता हो।


ऐसा न हो कि कुछ प्रकरणों में से प्रश्न पूछ लिए जाएँ और कुछ बिल्कुल छूट जाएँ। समुचितवरण तभी हो सकता है जबकि परीक्षण में प्रश्नों की संख्या अधिक हो तथा प्रश्न इस प्रकार के हो कि वे पढ़ाए हुए सभी क्षेत्रों का उचित प्रतिनिधित्व कर सके।


5. निदानात्मकता

एक अच्छे उत्तम परीक्षण में निदानात्मकता का गुण भी होना चाहिए। जिस तरह किसी भी रोग का उचित निदान उसके उपचार के लिए आवश्यक है, उसी प्रकार छात्र की कमियों, कठिनाईयों तथा रुचियों इत्यादि का उचित ज्ञान भी आवश्यक है जिससे उनकी रूकावटों को दूर किया जा सके। अच्छा परीक्षण वही कहा जा सकता है जो इस दिशा में उचित सहयोग दे।


व्यावहारिकता (Pacticability):-

एक उत्तम परीक्षण के व्यावहारिक होने का अर्थ उसकी निम्नलिखित विशेषताओं में है :-


1. बनाने में आसानी

परीक्षण का साधन अधिक खर्चीला नहीं होना चाहिए तथा उसको तैयार करने अधिक परिश्रम और समय की अधिकता न लगे, इसका ध्यान अवश्य रखना चाहिए।


2. परीक्षा लेने में आसानी

जब विद्यार्थियों की जांच की जाय तो इनकी बिना किसी प्रबन्धशात्मक तथा अनुशासन संबंधी समस्या को ठीक जांच की जा सके ताकि छात्र नकल तथा आपस में पूछताछ न कर सकें।


3. अंक लगाने में आसानी

परीक्षक को विद्यार्थियों को अंक देने में आसानी हो। अधिक लम्बे-2 प्रश्नों को ठीक प्रकार से पढ़ने और समझने के बाद सभी विद्यार्थियों के उत्तर का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए अंक देना अध्यापक के लिए परेशानी का सबब बन जाता है। इसलिए परीक्षण ऐसा होना चाहिए जिसमें अध्यापक को उचित और न्यायपूर्ण अंक देने में आसानी हो।


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