माध्यमिक स्तर पर गृह विज्ञान विषय की प्रासंगिकता की व्याख्या करे।
माध्यमिक स्तर पर गृह विज्ञान विषय की प्रासंगिकता की व्याख्या 1959 में अमेरिकी होम इकोनोमिक्स द्वारा स्थापित एक समिति ने गृह विज्ञान शिक्षण विषय की प्रासंगिक को इन शब्दों में व्यक्त किया, "हम विश्वास करते हैं, कि गृह विज्ञान की सबसे स्पष्ट एवं नवीन दिशा यह होगी कि वह बालिकाओं में उन मौलिक योग्यताओं को विकसित करने के योग दे जो उनके पारिवारिक जीवन हेतु प्रभावी हो तथा जो वैयक्तिक एवं पारिवारिक परिस्थितियों में भिन्नता होते हुए भी उनके व्यक्तिगत और परिवार के जीवन में सफलता प्रदान करें।"
वर्तमान परिस्थितियों में माध्यमिक स्तर पर गृह विज्ञान की प्रासंगिकता निम्नलिखित है -
माध्यमिक "गृह" समय की प्रारम्भिक एवं आधारभूत इकाई है। प्रत्येक छात्र की पूर्ण ज्ञान होना चाहिये, कि गृह के प्रति उसके क्या कर्तव्य है उस भावना के विकसित होने पर ही वे परिवार के प्रति अपने कर्तव्यों को पूर्ण करने की ओर अग्रसर हो सकेगी।
'सन्तोष' की भावना का जीवन में अत्यधिक महत्व है। कहा जाता है "सन्तोषी सदा सुखी" गृह विज्ञान की छात्राओं को सिखाया जाना चाहिये कि उपलब्ध साधनों का उपयोग अधि कितम सन्तुष्टि के लिये कैसे किया जाये। जिस व्यक्ति के अन्दर सन्तोष की भावना पर्याप्त रुप से विकसित हो जाती है। वह मानसिक द्वन्द्वों, ईर्ष्या, द्वेष, निराशा आदि अवगुणों से बचा रहता है।
मनुष्य सामाजिक प्राणी है उसके जीवन की सफलता मधुर सामाजिक सम्बन्धों एवं स्वास्थ पर बहुत कुछ निर्भर करती है गृह विज्ञान के द्वारा उन छात्राओं को उन समस्त गुणों को विभूषित करना चाहिये जो स्वस्थ सामाजिक सम्बन्ध स्थापित करने में विशेष रुप से सहायक होते है एक दूसरे के सहयोग देते हैं तथा पारस्परिक प्रेम का वृद्धि के लिए एक-दूसरे की मनोवृत्तियों का सम्मान करते हैं। यदि छात्रायें काम करते समय असामाजिक व्यवहार का प्रदर्शन करे तो शिक्षिका को इस व्यवहार की सहानुभूति पूर्ण ढंग से आलोचना करके निरूत्साहित करना चाहिये।
माध्यमिक स्तर पर छात्रायें शरीर एवं स्वास्थ विज्ञान का ज्ञान प्राप्त करके मनुष्य भी भोजन सम्बन्धी आवश्यकता का अनुभव करने लगती है तथा स्वास्थ सम्बन्धी नियमों से परिचित हो जाती है इन सबके अतिरिक्त वे स्वास्थ्य सम्बन्धी आदतों की पारिवारिक सदस्यों के शरीर में व्यवहृत करने का प्रयास करती हैं।
गृह विज्ञान के शिक्षा द्वारा छात्राओं को स्वास्थ्य सम्बन्धी नियमों से अवगत कराया जाता है तथा गृह-कार्य करने की उन कुशल विधियों का बोध कराया जाता है। माध्यमिक स्तर छात्रायें पाकशास्त्र का ज्ञानार्जन कर परिवार के सभी लोगों को स्वास्थवर्द्धक एवं स्वादिष्ट भोजन का रसास्वादन कराती है। गृह सम्बन्धी समस्त कार्यों में कुशलता प्राप्त करने पर वे आत्मविश्वासी बन जाती है। गृह-कार्य करने की उन कुशल विधियों का बोध कराया जाता है। कढ़ाई व सिलाई के शिक्षण द्वारा छात्रायें अपने व बच्चों की आवश्यकता के कपड़े स्वयं ही सीकर कपड़े का सदुपयोग तथा धन की बचत कर सकती है।
सुव्यवस्थित एवं सुसज्जित 'गृह' सुखी और शान्तिमय जीवन का प्रतीक है। गृह विज्ञान में माध्यमिक स्तर पर छात्राओं को घर के बाहर पर्यावरण को सजाकर आकर्षक बनाने का व्यवहारिक ज्ञान दिया जाता है।
माध्यमिक स्तर पर गृह विज्ञान छात्राओं को अवकाश काल का सदुपयोग करने का प्रशिक्षण दिया जाता है, तथा छात्राओं को अनेक उपयोगी क्रिया-कलापों का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। गृह व्यवस्था तथा विभिन्न प्रकार से सजाना आदि कार्यों को भली प्रकार सीख जाती है। वे अवकाश के समय में रुचि के अनुकूल उक्त कार्य स्वयं कर सकती है तथा परिवार के अन्य सदस्यों को भी इन कार्यों को खाली समय में करने के लिये प्रोत्साहित कर सकती है।
इस प्रकार गृह विज्ञान विषय के बारे में जानकारी प्राप्त करके उसका अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपने जीवन को ऊँचा उठा सकती हैं तथा अपने जीवन को सुख-मय बना सकती है। इस प्रकार गृह विज्ञान विषय का माध्यमिक स्तर पर ज्ञान अति आवश्यक है।

