भाषा - Bhasha
अपनी बात दूसरों को समझाने और दूसरों की बात को समझने का साधन भाषा कहलाता है।
जैसे -
श्रेया बोलकर खाना मांग रही है।
माली बोर्ड पर लिखकर फूल तोड़ने से मना कर रहा है।
शुभ समाचार सुनकर देश - विदेश का हाल जान रहा है।
राम और श्याम पढ़कर मेले का समय ज्ञात कर रहे हैं।
भाषा के रूप - Bhasha ke Rup
भाषा के दो रूप होते है-
( क ) मौखिक भाषा
( ख ) लिखित भाषा
( क ) मौखिक भाषा
मौखिक भाषा में हम अपनी बात बोलकर समझातें हैं और दूसरों की बात सुनकर समझते हैं।
( ख ) लिखित भाषा
लिखित भाषा में हम अपनी बात लिखकर समझाते हैं और दूसरों की बात पढ़कर समझते हैं।

